यह एक बहुत ही मनमोहक पद है, जिसकी रचना महाकवि सूरदास ने की है। इस पद में बालकृष्ण अपनी माँ यशोदा से माखन खाने की बात से मुकरते हुए बड़ी मासूमियत और चतुराई से अपनी सफाई दे रहे हैं। यह पद माँ और पुत्र के बीच के प्यारे रिश्ते को दर्शाता है।
कवि का संक्षिप्त परिचय
यह प्यारा सा पद महाकवि सूरदास जी ने लिखा है, जो श्रीकृष्ण के बहुत बड़े भक्त थे। माना जाता है कि उनका जन्म 15वीं शताब्दी में हुआ था। वे अपनी कविताओं में श्रीकृष्ण के बचपन की नटखट शरारतों का बहुत सुंदर वर्णन करते हैं। उनकी रचनाएँ ब्रजभाषा में हैं और आज भी पूरे भारत में बहुत प्रेम से गाई जाती हैं।
पद का सरल सार
इस पद में, माँ यशोदा बालकृष्ण से पूछती हैं कि क्या उन्होंने माखन खाया है। इस पर बालकृष्ण बहुत ही भोलेपन से अपनी सफाई देते हैं।
वे कहते हैं, “माँ, मैंने माखन नहीं खाया है। तुम तो सुबह होते ही मुझे गायों के पीछे मधुबन भेज देती हो। मैं तो दिनभर बंसीवट के पास भटकता रहता हूँ और शाम होने पर ही घर लौटता हूँ।”
फिर वे एक और तर्क देते हैं, “मैं तो छोटा-सा बालक हूँ, मेरे हाथ भी छोटे-छोटे हैं। भला मैं ऊँचे टंगे छींके तक कैसे पहुँच सकता हूँ?”
अपनी बात को और पुख्ता करने के लिए वे अपने मित्रों पर ही आरोप लगा देते हैं और कहते हैं, “ये सारे ग्वाल-बाल मेरे दुश्मन बन गए हैं। इन्होंने ही जबरदस्ती मेरे मुँह पर माखन लगा दिया है।”
अंत में, वे रूठने का नाटक करते हुए कहते हैं, “ये लो अपनी लाठी और कंबल, तुमने मुझे बहुत परेशान किया है।”
सूरदास जी कहते हैं कि बालकृष्ण की इन प्यारी और मासूम बातों को सुनकर माँ यशोदा गुस्सा भूलकर हँस देती हैं और उन्हें उठाकर गले से लगा लेती हैं।

बालकृष्ण अपनी चतुराई भरी बातों से माँ यशोदा का मन मोह लेते हैं।
पद का मुख्य भाव
इस पद का मुख्य भाव वात्सल्य रस है। वात्सल्य का अर्थ है माता-पिता का अपने बच्चे के प्रति प्रेम। यहाँ माँ यशोदा जानती हैं कि कृष्ण झूठ बोल रहे हैं, फिर भी वे उनकी चतुराई भरी बातों और मासूमियत पर गुस्सा नहीं करतीं, बल्कि उन पर और भी प्यार लुटाती हैं।
अभ्यास के लिए नए प्रश्न और उत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
- श्रीकृष्ण ने माखन चोरी का आरोप किस पर लगाया?
(क) माँ यशोदा पर
(ख) अपने ग्वाल-बाल मित्रों पर
(ग) मधुबन पर
(घ) अपनी छोटी भुजाओं पर
उत्तर: (ख) अपने ग्वाल-बाल मित्रों पर - श्रीकृष्ण के अनुसार वे दिनभर कहाँ भटकते रहे?
(क) मंदिर में
(ख) घर के आँगन में
(ग) बंसीवट के पास
(घ) जमुना किनारे
उत्तर: (ग) बंसीवट के पास - ‘छीको’ क्या होता है?
(क) छींकने की क्रिया
(ख) एक प्रकार का खिलौना
(ग) दूध-दही रखने के लिए लटकाया जाने वाला जाल
(घ) एक प्रकार का बर्तन
उत्तर: (ग) दूध-दही रखने के लिए लटकाया जाने वाला जाल - कृष्ण की बातें सुनकर माँ यशोदा ने क्या किया?
(क) उन्हें डाँटा
(ख) उन्हें दंड दिया
(ग) हँसकर गले से लगा लिया
(घ) ग्वाल-बालों से पूछा
उत्तर: (ग) हँसकर गले से लगा लिया - श्रीकृष्ण ने माँ को ‘मन की अति भोरी’ क्यों कहा?
(क) क्योंकि वे बहुत गुस्सा करती थीं
(ख) क्योंकि वे बहुत सीधी थीं और दूसरों की बातों में आ जाती थीं
(ग) क्योंकि वे उन्हें प्यार नहीं करती थीं
(घ) क्योंकि वे उन्हें माखन नहीं देती थीं
उत्तर: (ख) क्योंकि वे बहुत सीधी थीं और दूसरों की बातों में आ जाती थीं
लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न 1: श्रीकृष्ण ने माखन न खाने के लिए अपनी दिनचर्या का क्या तर्क दिया?
उत्तर: श्रीकृष्ण ने तर्क दिया कि माँ यशोदा उन्हें सुबह-सुबह ही गाय चराने मधुबन भेज देती हैं और वे शाम को ही घर लौटते हैं, इसलिए उनके पास माखन खाने का समय ही नहीं था। - प्रश्न 2: श्रीकृष्ण ने अपनी लाठी और कंबल वापस करने की बात क्यों कही?
उत्तर: श्रीकृष्ण ने अपनी माँ पर यह जताने के लिए कि वे उनसे नाराज़ हैं और माँ उन पर भरोसा नहीं कर रहीं, रूठने का नाटक करते हुए अपनी लाठी और कंबल वापस करने की बात कही। - प्रश्न 3: माखन तक न पहुँच पाने के लिए कृष्ण ने क्या कारण बताया?
उत्तर: कृष्ण ने कहा कि वे एक छोटे बालक हैं और उनके हाथ भी बहुत छोटे हैं, इसलिए वे ऊँचे टंगे छींके तक पहुँच ही नहीं सकते। - प्रश्न 4: “जानि परायो जायो” – इस पंक्ति से कृष्ण का क्या भाव प्रकट होता है?
उत्तर: इस पंक्ति से कृष्ण का अपनी माँ से उलाहना देने का भाव प्रकट होता है। वे कहना चाहते हैं कि माँ उन पर विश्वास न करके ऐसा व्यवहार कर रही हैं, जैसे वे उनके सगे पुत्र न होकर पराए हों। - प्रश्न 5: इस पद में ‘पहर’ शब्द का प्रयोग हुआ है। एक दिन में कितने पहर होते हैं?
उत्तर: एक दिन में आठ पहर होते हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न 1: यह जानते हुए भी कि श्रीकृष्ण झूठ बोल रहे हैं, माँ यशोदा ने उन्हें गले क्यों लगा लिया? इससे माँ और पुत्र के रिश्ते के बारे में क्या पता चलता है?
उत्तर: माँ यशोदा यह जानती थीं कि श्रीकृष्ण झूठ बोल रहे हैं, लेकिन उन्होंने श्रीकृष्ण को गले इसलिए लगा लिया क्योंकि वे उनकी चतुराई भरी और मासूम बातों पर मोहित हो गईं। एक माँ के लिए अपने बच्चे की शरारतें भी आनंद का स्रोत होती हैं। इससे माँ और पुत्र के रिश्ते की गहराई का पता चलता है। यह रिश्ता सिर्फ अनुशासन का नहीं, बल्कि गहरे प्रेम, स्नेह और वात्सल्य का है। - प्रश्न 2: बालकृष्ण ने खुद को निर्दोष साबित करने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए? क्रम से लिखिए।
उत्तर: बालकृष्ण ने खुद को निर्दोष साबित करने के लिए कई तर्क दिए:- समय का तर्क: वे सुबह से शाम तक गाय चराने के लिए घर से बाहर थे।
- शारीरिक अक्षमता का तर्क: उनका कद छोटा है और हाथ भी छोटे हैं, इसलिए वे ऊँचे छींके तक नहीं पहुँच सकते।
- मित्रों पर आरोप: उन्होंने सारा दोष अपने ग्वाल-बाल मित्रों पर डाल दिया।
- माँ को भावनात्मक उलाहना: उन्होंने माँ को ही भोली बताकर और खुद को पराया बेटा बताकर मनाने की कोशिश की।
- प्रश्न 3: सूरदास के इस पद की भाषा और भाव की सुंदरता पर अपने विचार लिखिए।
उत्तर: सूरदास का यह पद ब्रजभाषा में लिखा गया है, जो बहुत ही मीठी और संगीतात्मक है। भाषा बहुत सरल है, जिससे एक छोटे बच्चे के मुँह से निकले शब्द स्वाभाविक लगते हैं। भाव की दृष्टि से, यह पद वात्सल्य रस का एक अद्भुत उदाहरण है। सूरदास ने बाल मनोविज्ञान का बहुत गहरा चित्रण किया है। एक बच्चा जब पकड़ा जाता है तो कैसे-कैसे बहाने बनाता है, यह बहुत ही सजीव रूप में दिखाया गया है। कृष्ण की चतुराई और यशोदा का प्रेम, इन दोनों भावों का संगम इस पद को अत्यंत सुंदर और हृदयस्पर्शी बना देता है।
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