अध्याय 7: जलाते चलो

Class 6 Hindi Chapter 7 Jalate Chalo Notes

यह एक प्रेरणादायक कविता है जिसके कवि श्री द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी हैं। इस कविता में कवि ने हमें निरंतर अच्छे कार्य करने और कभी भी उम्मीद न छोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया है।

कविता का सरल सारांश

इस कविता में कवि हमें प्रेम और आशा के दीपक लगातार जलाते रहने के लिए कहते हैं, ताकि इस धरती से अज्ञान और नफरत का अंधेरा एक दिन खत्म हो सके। कवि कहते हैं कि भले ही विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है कि वह अंधेरी रात को भी दिन जैसी रोशनी से भर सकता है, लेकिन दुनिया में तो दिन के उजाले में भी नफरत और निराशा का अंधेरा फैलता जा रहा है। कवि के अनुसार, बिना प्रेम और संवेदना के जलाई गई यह वैज्ञानिक रोशनी हमें सही रास्ता नहीं दिखा सकती।

कवि मनुष्य को याद दिलाते हैं कि उसने ही सबसे पहले अंधेरे की चुनौती को स्वीकार किया था और उम्मीद का पहला दीपक जलाया था। कवि कहते हैं कि हमें उम्मीद की इस नाव को लगातार आगे बढ़ाते रहना है, एक दिन हमें अंधेरे का किनारा ज़रूर मिलेगा।

युगों से मनुष्य ने कठिनाइयों की चट्टान पर अनगिनत दीये जलाए हैं, जिनमें से बहुतों को मुश्किलों की हवा ने बुझा दिया। लेकिन जो दीये बुझ गए, वे भी अपनी रोशनी की एक ज्योति छोड़ गए हैं, जिससे भविष्य में अंधेरे को मिटाने में मदद मिलेगी। आशा के दीये और निराशा के तूफ़ान की यह लड़ाई हमेशा से चलती आई है और चलती रहेगी। अंत में कवि कहते हैं कि अगर इस धरती पर उम्मीद का एक भी दीया जलता रहेगा, तो एक दिन इस निराशा की रात का अंत होगा और आशा का सवेरा ज़रूर आएगा।

कविता के सांकेतिक अर्थ

A single lit clay diya (lamp) casting a warm glow in the darkness.

कविता में ‘दीया जलाना’ आशा, ज्ञान और प्रेम का प्रतीक है।

इस कविता में शब्दों के गहरे और सांकेतिक अर्थ हैं:

  • दिया/दीपक जलाना: अच्छे काम करना, उम्मीद रखना, ज्ञान फैलाना।
  • स्नेह: प्रेम, दया, करुणा।
  • अँधेरा/तिमिर/निशा: निराशा, अज्ञान, नफरत, अन्याय।
  • तूफ़ान/पवन: मुश्किलें, बाधाएँ, नकारात्मक ताकतें।
  • सवेरा: एक बेहतर और खुशहाल भविष्य, आशा की जीत।
  • विद्युत-दिये: बिना प्रेम और भावना के की गई भौतिक प्रगति।

कवि का संक्षिप्त परिचय

इस कविता के रचयिता श्री द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी (1916-1998) हैं। वे बच्चों के लिए बहुत ही प्यारी कविताएँ लिखते थे। उनकी कविताओं के मुख्य विषय प्रकृति, देश-प्रेम और जीव-जंतु हुआ करते थे।

अभ्यास के लिए नए प्रश्न और उत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. कविता में ‘स्नेह भर-भर’ दिये जलाने का क्या अर्थ है?
    (क) तेल से दीया जलाना
    (ख) प्रेम और दया के साथ अच्छे काम करना
    (ग) मोमबत्ती जलाना
    (घ) बिजली के बल्ब जलाना
    उत्तर: (ख) प्रेम और दया के साथ अच्छे काम करना
  2. कवि के अनुसार, दिन में भी ‘अमावस निशा-सी’ क्यों घिर रही है?
    (क) सूर्य ग्रहण के कारण
    (ख) बादलों के कारण
    (ग) दुनिया में बढ़ती नफरत और निराशा के कारण
    (घ) बिजली चले जाने के कारण
    उत्तर: (ग) दुनिया में बढ़ती नफरत और निराशा के कारण
  3. ‘तिमिर की सरित’ को पार करने के लिए कवि ने किस चीज़ की नाव बनाने की बात कही है?
    (क) लकड़ी की नाव
    (ख) कागज की नाव
    (ग) दीप की नाव
    (घ) लोहे की नाव
    उत्तर: (ग) दीप की नाव
  4. बुझे हुए दीयों से हमें क्या मिलेगा?
    (क) अँधेरा
    (ख) धुआँ
    (ग) उजेला (प्रेरणा)
    (घ) कुछ नहीं
    उत्तर: (ग) उजेला (प्रेरणा)
  5. कवि के अनुसार, रात का सवेरे में बदलने के लिए क्या ज़रूरी है?
    (क) सूरज का निकलना
    (ख) मुर्गे का बाँग देना
    (ग) धरती पर कम से कम एक दीये का जलते रहना
    (घ) चाँद का छिप जाना
    उत्तर: (ग) धरती पर कम से कम एक दीये का जलते रहना

लघु उत्तरीय प्रश्न

  1. प्रश्न 1: कवि ने ‘विद्युत-दिये’ को बुझाने के लिए क्यों कहा है?
    उत्तर: कवि ने ‘विद्युत-दिये’ को बुझाने के लिए इसलिए कहा है क्योंकि वे मानते हैं कि ये दीये बिना स्नेह, यानी बिना प्रेम और संवेदना के जल रहे हैं। ऐसी रोशनी जो सिर्फ भौतिक तरक्की दिखाए लेकिन इंसान को सही राह न दिखाए, वह व्यर्थ है।
  2. प्रश्न 2: ‘दिये और तूफ़ान की यह कहानी’ से कवि का क्या तात्पर्य है?
    उत्तर: ‘दिये और तूफ़ान की यह कहानी’ से कवि का तात्पर्य अच्छाई और बुराई के बीच के शाश्वत संघर्ष से है। यहाँ ‘दिया’ आशा और अच्छाई का प्रतीक है, जबकि ‘तूफ़ान’ निराशा और बुराई का।
  3. प्रश्न 3: कवि मनुष्य को क्या याद दिला रहे हैं?
    उत्तर: कवि मनुष्य को याद दिला रहे हैं कि उसने ही सबसे पहले अंधकार की चुनौती को स्वीकार करते हुए उम्मीद का पहला दीया जलाया था।
  4. प्रश्न 4: कविता की कौन सी पंक्ति सबसे अधिक आशा जगाती है?
    उत्तर: कविता की पंक्ति “रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि, कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा” सबसे अधिक आशा जगाती है, क्योंकि यह बताती है कि उम्मीद की एक छोटी सी किरण भी बड़े से बड़े अँधेरे को मिटा सकती है।
  5. प्रश्न 5: कवि के अनुसार, अनगिनत दीयों को किसने बुझाया है?
    उत्तर: कवि के अनुसार, अनगिनत दीयों को पवन (तूफ़ान रूपी मुश्किलों) ने बुझाया है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

  1. प्रश्न 1: “भले शक्ति विज्ञान में है निहित वह कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा-सी, मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी।” इन पंक्तियों का भाव अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।
    उत्तर: इन पंक्तियों में कवि विज्ञान की प्रगति और मानवीय मूल्यों के बीच एक गहरा अंतर बता रहे हैं। वे कहते हैं कि विज्ञान इतना शक्तिशाली हो गया है कि वह अपनी रोशनी से अमावस्या की काली रात को भी रोशन कर सकता है। लेकिन कवि इस बात पर चिंता जताते हैं कि इतनी भौतिक तरक्की के बावजूद, दुनिया में दिन के उजाले में भी नफरत और निराशा का अंधेरा छाया हुआ है। इसका मतलब है कि केवल बाहरी रोशनी से कुछ नहीं होता, जब तक इंसानों के मन में प्रेम और करुणा की रोशनी न हो।
  2. प्रश्न 2: इस कविता का शीर्षक ‘जलाते चलो’ क्यों रखा गया है? क्या आप कोई और शीर्षक सुझा सकते हैं?
    उत्तर: इस कविता का शीर्षक ‘जलाते चलो’ बहुत सार्थक है। यह शीर्षक हमें निरंतर कर्म करने की प्रेरणा देता है। ‘जलाते चलो’ का अर्थ है कि हमें उम्मीद, प्रेम और ज्ञान के दीये बिना रुके, बिना थके लगातार जलाते रहना है।
    इस कविता के लिए अन्य शीर्षक हो सकते हैं:

    • आशा का दीया
    • अँधेरे से जंग
  3. प्रश्न 3: कवि के अनुसार, मानवता ने अँधेरे का सामना कैसे किया है और भविष्य में उसे क्या करते रहना चाहिए?
    उत्तर: कवि के अनुसार, मानवता ने युगों से अँधेरे (अज्ञान, अन्याय) का सामना किया है। मनुष्य ने ही हिम्मत दिखाकर उम्मीद का दीया जलाया। उसने मुश्किलों की चट्टान पर लगातार अनगिनत दीये जलाए हैं, भले ही कई दीये बाधाओं के तूफ़ान में बुझ गए हों। भविष्य के लिए कवि का संदेश है कि हमें यह प्रयास नहीं छोड़ना है। हमें निरंतर प्रेम के साथ उम्मीद के दीये जलाते रहना है, क्योंकि हमारे छोटे-छोटे अच्छे कामों से ही एक दिन दुनिया का अँधेरा मिटेगा।

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