इस पाठ में हम महान कवि अब्दुर्रहीम खानखाना (रहीम) द्वारा रचे गए कुछ दोहों को पढ़ेंगे। रहीम अपने दोहों के माध्यम से जीवन जीने की गहरी और मूल्यवान बातें सिखाते हैं, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।
कवि का संक्षिप्त परिचय
रहीम जी भक्तिकाल के एक बहुत ही प्रसिद्ध और सम्मानित कवि थे। उनका जन्म 16वीं शताब्दी में हुआ माना जाता है। उन्होंने अपनी कविताओं में नीति (सही-गलत की पहचान), भक्ति और प्रेम के बारे में बहुत खूबसूरती से लिखा है। वे अवधी और ब्रजभाषा दोनों में लिखते थे। रहीम जी के दोहे आम लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं क्योंकि वे बहुत ही सरल भाषा में जीवन की बड़ी-बड़ी सीख दे जाते हैं।

रहीम अपने नीतिपरक दोहों के लिए बहुत प्रसिद्ध हैं।
दोहों का सरल अर्थ और सीख
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रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि।
जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि।।सरल शब्दों में: रहीम कहते हैं कि किसी बड़ी वस्तु को देखकर किसी छोटी वस्तु को बेकार समझकर फेंक नहीं देना चाहिए। हर वस्तु का अपना महत्व होता है। जहाँ एक छोटी सी सुई काम आती है, वहाँ एक बड़ी तलवार कुछ नहीं कर सकती।
जीवन में सीख: हमें कभी भी किसी व्यक्ति को छोटा या बड़ा नहीं आँकना चाहिए। -
तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान।
कहि रहीम पर काज हित, संपति संचहि सुजान।।सरल शब्दों में: पेड़ कभी अपने फल खुद नहीं खाते और तालाब कभी अपना पानी खुद नहीं पीता। रहीम कहते हैं कि ठीक इसी तरह, सज्जन लोग भी धन-संपत्ति दूसरों की भलाई (परोपकार) के लिए ही इकट्ठा करते हैं।
जीवन में सीख: हमें प्रकृति से परोपकार की भावना सीखनी चाहिए। -
रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय।
टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय।।सरल शब्दों में: रहीम जी कहते हैं कि प्रेम का रिश्ता एक धागे की तरह बहुत नाज़ुक होता है, इसे झटके से नहीं तोड़ना चाहिए। अगर यह एक बार टूट जाता है, तो फिर से पहले की तरह नहीं जुड़ता; अगर जुड़ भी जाए तो उसमें एक गाँठ हमेशा के लिए पड़ जाती है।
जीवन में सीख: हमें अपने रिश्तों को बहुत सँभालकर रखना चाहिए। -
रहिमन पानी राखिए, बिनु पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून।।सरल शब्दों में: इस दोहे में ‘पानी’ शब्द के तीन अलग-अलग अर्थ हैं। रहीम कहते हैं कि हमें हमेशा ‘पानी’ को बचाकर रखना चाहिए।
– मोती के लिए ‘पानी’ का अर्थ है चमक।
– मनुष्य (मानुष) के लिए ‘पानी’ का अर्थ है इज़्ज़त।
– चूने (चून) के लिए ‘पानी’ का अर्थ है जल।
जीवन में सीख: मनुष्य के लिए उसका सम्मान सबसे बड़ी पूंजी है। -
रहिमन बिपदाहू भली, जो थोरे दिन होय।
हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय।।सरल शब्दों में: रहीम कहते हैं कि अगर मुसीबत थोड़े समय के लिए आती है, तो वह भी अच्छी होती है, क्योंकि मुसीबत के समय ही हमें इस दुनिया में अपने और पराए की पहचान होती है।
जीवन में सीख: मुश्किल समय ही हमें सच्चे दोस्तों की पहचान कराता है। -
रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल।
आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल।।सरल शब्दों में: रहीम कहते हैं कि हमारी जीभ तो पागल होती है, जो बिना सोचे-समझे कुछ भी बोल देती है। बोलने के बाद तो वह खुद मुँह के अंदर चली जाती है, पर उसके बुरे शब्दों के कारण हमारे सिर को जूते खाने पड़ते हैं।
जीवन में सीख: हमें हमेशा सोच-समझकर बोलना चाहिए। -
कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत।
बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत।।सरल शब्दों में: रहीम जी कहते हैं कि जब हमारे पास धन-दौलत होती है, तो बहुत से लोग हमारे सगे-संबंधी बन जाते हैं। लेकिन सच्चा मित्र तो वही है, जो मुसीबत की कसौटी पर भी हमारा साथ निभाता है।
जीवन में सीख: सच्चा दोस्त दुःख में भी साथ खड़ा रहता है।
अभ्यास के लिए नए प्रश्न और उत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
- ‘तरुवर फल नहिं खात हैं’ – इस पंक्ति में ‘तरुवर’ का क्या अर्थ है?
(क) तालाब
(ख) फल
(ग) पेड़
(घ) सज्जन
उत्तर: (ग) पेड़ - रहीम के अनुसार, प्रेम का रिश्ता टूटने पर क्या होता है?
(क) वह और मज़बूत हो जाता है
(ख) वह हमेशा के लिए खत्म हो जाता है
(ग) वह जुड़ तो जाता है पर उसमें गाँठ पड़ जाती है
(घ) कोई फर्क नहीं पड़ता
उत्तर: (ग) वह जुड़ तो जाता है पर उसमें गाँठ पड़ जाती है - मनुष्य के संदर्भ में ‘पानी’ का क्या अर्थ है?
(क) जल
(ख) चमक
(ग) दया
(घ) सम्मान
उत्तर: (घ) सम्मान - रहीम जी ने किसे ‘बावरी’ कहा है?
(क) संपत्ति को
(ख) जीभ को
(ग) विपत्ति को
(घ) तलवार को
उत्तर: (ख) जीभ को - सच्चे और झूठे मित्रों की पहचान कब होती है?
(क) खुशी के समय
(ख) धन आने पर
(ग) मुसीबत के समय
(घ) त्योहार के समय
उत्तर: (ग) मुसीबत के समय
लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न 1: रहीम ने एक साथ सब कुछ साधने की कोशिश करने के क्या परिणाम बताए हैं?
उत्तर: रहीम के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति एक साथ सब कुछ पाने या करने की कोशिश करता है, तो उसे कुछ भी हासिल नहीं होता और उसके सारे काम बिगड़ जाते हैं। - प्रश्न 2: रहीम के अनुसार, प्रसन्न होने पर भी कुछ न देने वाला व्यक्ति किससे भी बदतर है?
उत्तर: रहीम के अनुसार, किसी की कला से प्रसन्न होकर भी उसे कुछ न देने वाला व्यक्ति उस हिरण से भी बदतर है, जो संगीत पर मुग्ध होकर अपना शरीर तक शिकारी को सौंप देता है। - प्रश्न 3: बिगड़ी हुई बात क्यों नहीं बन सकती? रहीम ने इसके लिए क्या उदाहरण दिया है?
उत्तर: रहीम कहते हैं कि बिगड़ी हुई बात लाखों कोशिशों के बाद भी नहीं बन सकती। उन्होंने इसके लिए फटे हुए दूध का उदाहरण दिया है, जिसे कितना भी मथो, उससे मक्खन नहीं निकलता। - प्रश्न 4: मुसीबत के समय कौन सहायता करता है? इसके लिए रहीम ने कमल और सूर्य का उदाहरण कैसे दिया है?
उत्तर: रहीम के अनुसार, मुसीबत के समय व्यक्ति की अपनी संपत्ति ही उसकी सहायता करती है। उन्होंने उदाहरण दिया है कि जैसे पानी के बिना कमल को सूर्य भी नहीं बचा सकता। - प्रश्न 5: दोहे की क्या विशेषता होती है, जैसा कि रहीम ने बताया है?
उत्तर: रहीम के अनुसार, दोहे की विशेषता यह है कि इसमें अक्षर बहुत कम होते हैं, लेकिन इसका अर्थ बहुत गहरा और व्यापक होता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न 1: रहीम के दोहों से मिलने वाली किन्हीं तीन नैतिक शिक्षाओं का अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।
उत्तर: रहीम के दोहों से कई नैतिक शिक्षाएँ मिलती हैं, जिनमें से तीन प्रमुख हैं:- रिश्तों का सम्मान: प्रेम के रिश्ते बहुत नाज़ुक होते हैं और इन्हें संभालकर रखना चाहिए।
- आत्म-निर्भरता का महत्व: व्यक्ति को अपनी शक्ति पर भरोसा करना चाहिए क्योंकि मुसीबत में बाहरी मदद काम नहीं आती।
- विवेकपूर्ण व्यवहार: हर छोटी-बड़ी चीज़ का सम्मान करना चाहिए और अपने दुःख को हर किसी के सामने प्रकट नहीं करना चाहिए।
- प्रश्न 2: “रहिमन पानी राखिए” वाले दोहे का सौंदर्य उसके ‘श्लेष अलंकार’ में है। इस कथन को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: यह कथन बिलकुल सही है। इस दोहे में ‘पानी’ शब्द का प्रयोग एक बार हुआ है, लेकिन तीन अलग-अलग संदर्भों में इसके तीन अलग-अलग अर्थ निकलते हैं: मोती के लिए चमक, मनुष्य के लिए इज़्ज़त, और चूने के लिए जल। एक ही शब्द से कई अर्थ प्रकट करना ‘श्लेष अलंकार’ का सुंदर उदाहरण है। - प्रश्न 3: रहीम के दोहों की कौन सी बात आपको सबसे अच्छी लगी और क्यों? किसी एक दोहे के आधार पर समझाइए।
उत्तर: मुझे “रहिमन बिपदाहू भली…” वाली बात सबसे अच्छी लगी क्योंकि यह हमें जीवन की एक बहुत बड़ी सच्चाई सिखाती है। अक्सर हम मुश्किलों से घबराते हैं, लेकिन रहीम बताते हैं कि मुसीबतें हमें इंसानों की परख करना सिखाती हैं। जब संकट आता है, तो केवल सच्चे दोस्त ही हमारा साथ देते हैं। इस तरह, मुसीबत एक शिक्षक की तरह हमें अच्छे और बुरे का अंतर बता जाती है।
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