अध्याय 13: पेड़ की बात

Class 6 Hindi Chapter 13 Ped Ki Baat Notes

यह एक वैज्ञानिक लेख है जिसे भारत के महान वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु ने लिखा है। इस पाठ में उन्होंने एक पेड़ के जन्म से लेकर उसके अंत तक की कहानी को बहुत ही रोचक और सरल भाषा में समझाया है। उन्होंने यह सिद्ध किया है कि पेड़-पौधे भी हमारी तरह जीवित प्राणी होते हैं।

लेखक का संक्षिप्त परिचय

जगदीशचंद्र बसु (1858-1937) भारत के एक विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे। उन्होंने विज्ञान के कई क्षेत्रों जैसे जीवविज्ञान, भौतिकी और वनस्पति विज्ञान में महत्वपूर्ण कार्य किया। वे दुनिया के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने यह साबित किया कि पेड़-पौधों में भी जीवन होता है और वे भी अन्य जीवों की तरह अपने आसपास के वातावरण के प्रति जागरूक होते हैं।

एक पेड़ की कहानी (पाठ का सार)

जन्म (अंकुरण):

एक बीज बहुत दिनों तक मिट्टी के नीचे शांत पड़ा रहता है। जब वसंत के बाद बारिश का पानी उसे मिलता है, तो मानो बाहर से कोई उसे जागने के लिए पुकारता है। बीज का कठोर आवरण टूट जाता है और दो कोमल पत्तियों के साथ एक अंकुर बाहर निकलता है। इसका एक हिस्सा (जड़) मजबूती से मिट्टी में नीचे की ओर जाता है और दूसरा हिस्सा (तना) मिट्टी से बाहर निकलकर ऊपर की ओर बढ़ता है।

जीवन और भोजन:

पेड़ की जड़ें हमेशा नीचे की ओर और तना हमेशा प्रकाश की ओर ऊपर की ओर बढ़ता है। पेड़ों के दाँत नहीं होते, इसलिए वे केवल तरल भोजन ही ग्रहण करते हैं। जड़ें मिट्टी से पानी और उसमें घुले हुए पोषक तत्वों को सोखती हैं। यह भोजन पेड़ के अंदर बनी हजारों नलियों के माध्यम से पूरे शरीर में पहुँचता है। इसके अलावा, पेड़ अपनी पत्तियों पर बने अनगिनत छोटे-छोटे मुँह से हवा से भी भोजन ग्रहण करते हैं।

A simple diagram showing the life cycle of a tree from seed to full growth.

एक बीज से लेकर विशाल पेड़ बनने तक की यात्रा जीवन के चक्र को दर्शाती है।

पेड़ और हमारा रिश्ता:

हम साँस छोड़ते समय जो ज़हरीली ‘अंगारक’ वायु (कार्बन डाइऑक्साइड) बाहर निकालते हैं, पेड़ उसी को अपने भोजन के रूप में इस्तेमाल करते हैं और हवा को शुद्ध कर देते हैं। पेड़ सूर्य के प्रकाश की मदद से इस ज़हरीली हवा से अपना भोजन बनाते हैं।

संतान (फूल और बीज):

पेड़ मरने से पहले अपनी संतान यानी बीज छोड़कर जाने के लिए व्याकुल रहते हैं। बीजों की सुरक्षा के लिए वे फूलों का सुंदर घर बनाते हैं।

परागण और अंत:

पेड़ अपने रंग-बिरंगे फूलों और सुगंध से मधुमक्खियों और तितलियों जैसे मित्रों को बुलाते हैं। ये जीव जब फूलों से शहद पीते हैं तो पराग-कणों को एक फूल से दूसरे फूल तक पहुँचाते हैं, जिससे बीज पकते हैं। अपनी संतान (बीजों) को पोषण देने के बाद पेड़ का शरीर सूख जाता है और एक दिन वह टूटकर ज़मीन पर गिर जाता है।

अभ्यास के लिए नए प्रश्न और उत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. बीज को अंकुरित होने के लिए सबसे पहले किसकी आवश्यकता होती है?
    (क) धूप
    (ख) हवा
    (ग) पानी
    (घ) खाद
    उत्तर: (ग) पानी
  2. पेड़ का कौन-सा भाग हमेशा प्रकाश की ओर बढ़ता है?
    (क) जड़
    (ख) तना
    (ग) पत्तियाँ
    (घ) फूल
    उत्तर: (ख) तना
  3. हम साँस छोड़ते समय जो ‘अंगारक वायु’ निकालते हैं, उसे क्या कहते हैं?
    (क) ऑक्सीजन
    (ख) नाइट्रोजन
    (ग) कार्बन डाइऑक्साइड
    (घ) हाइड्रोजन
    उत्तर: (ग) कार्बन डाइऑक्साइड
  4. लेखक ने फूलों की तुलना किससे की है?
    (क) हँसते हुए चेहरे से
    (ख) रंग-बिरंगे निशानों से
    (ग) छोटे-छोटे घर से
    (घ) उपरोक्त सभी
    उत्तर: (घ) उपरोक्त सभी
  5. परागण की प्रक्रिया में पेड़ों की मदद कौन करता है?
    (क) हवा और पानी
    (ख) मधुमक्खी और तितली
    (ग) दूसरे पेड़
    (घ) सूर्य का प्रकाश
    उत्तर: (ख) मधुमक्खी और तितली

लघु उत्तरीय प्रश्न

  1. प्रश्न 1: एक अंकुर के दो मुख्य भाग कौन-से होते हैं और वे किस दिशा में बढ़ते हैं?
    उत्तर: एक अंकुर के दो मुख्य भाग जड़ और तना होते हैं। जड़ हमेशा नीचे मिट्टी की ओर बढ़ती है और तना हमेशा ऊपर प्रकाश की ओर बढ़ता है।
  2. प्रश्न 2: पेड़ अपना भोजन किन दो तरीकों से प्राप्त करते हैं?
    उत्तर: पेड़ अपना भोजन दो तरीकों से प्राप्त करते हैं: पहला, वे अपनी जड़ों द्वारा मिट्टी से पानी और पोषक तत्व सोखते हैं और दूसरा, वे अपनी पत्तियों द्वारा हवा से कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते हैं।
  3. प्रश्न 3: यदि किसी गमले को उल्टा लटका दिया जाए तो पौधे पर क्या असर होगा?
    उत्तर: यदि किसी गमले को उल्टा लटका दिया जाए तो भी पौधे का तना और पत्तियाँ मुड़कर ऊपर प्रकाश की ओर बढ़ने लगेंगी और जड़ें घूमकर नीचे की ओर लटक जाएँगी।
  4. प्रश्न 4: लेखक ने माँ की ममता की तुलना किससे की है और क्यों?
    उत्तर: लेखक ने माँ की ममता की तुलना स्पर्शमणि (पारस पत्थर) से की है। क्योंकि जैसे पारस पत्थर लोहे को सोना बना देता है, वैसे ही पेड़ की ममता का स्पर्श पाकर मिट्टी और हवा जैसी साधारण चीजों से भी सुंदर फूल खिल जाते हैं।
  5. प्रश्न 5: पेड़ की मृत्यु कैसे होती है?
    उत्तर: अपनी संतान (बीजों) को अपना सारा रस पिलाकर पेड़ का शरीर सूख और कमजोर हो जाता है। फिर वह हवा का एक हल्का झोंका भी सहन नहीं कर पाता और टूटकर जमीन पर गिर जाता है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

  1. प्रश्न 1: ‘पेड़ की बात’ पाठ के आधार पर एक बीज के पेड़ बनने और फिर समाप्त हो जाने तक की यात्रा का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
    उत्तर: एक बीज की यात्रा मिट्टी के नीचे से शुरू होती है, जहाँ वह बारिश का पानी पाकर अंकुरित होता है। उसका एक हिस्सा जड़ बनकर नीचे जाता है और दूसरा तना बनकर ऊपर आता है। वह अपनी जड़ों से मिट्टी का रस और पत्तियों से हवा पीकर बड़ा होता है। सूर्य का प्रकाश उसके लिए जीवन है। बड़ा होकर वह अपनी संतान (बीज) पैदा करने के लिए सुंदर फूल खिलाता है। जब मधुमक्खियों की मदद से उसके बीज पक जाते हैं, तो वह अपना सारा जीवन रस उन बीजों को पोषित करने में लगा देता है। अंत में, वह सूख जाता है और टूटकर मिट्टी में मिल जाता है।
  2. प्रश्न 2: लेखक ने यह क्यों कहा है कि “सोचकर देखा जाए तो हम भी प्रकाश की खुराक पाने पर ही जीवित हैं”?
    उत्तर: लेखक ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि हमारे जीवन का आधार भी अप्रत्यक्ष रूप से सूर्य का प्रकाश ही है। पेड़-पौधे सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को अपने अंदर भोजन के रूप में संचित करते हैं। हम इंसान और अन्य सभी जीव-जंतु इन्हीं पेड़-पौधों, अनाज और सब्ज़ियों को खाकर जीवित रहते हैं। इस तरह, पौधों में समाई सूर्य की ऊर्जा ही हमारे शरीर में पहुँचती है। यदि सूर्य न हो तो पेड़-पौधे नहीं होंगे और उनके बिना हमारा भी अस्तित्व नहीं होगा।
  3. प्रश्न 3: पेड़ और जीव-जंतुओं का रिश्ता आपसी सहयोग का है। इस कथन को पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
    उत्तर: पेड़ और जीव-जंतुओं का रिश्ता आपसी सहयोग का है, यह बात पाठ में कई जगह स्पष्ट होती है:

    • हवा का आदान-प्रदान: जीव-जंतु साँस छोड़ते समय कार्बन डाइऑक्साइड निकालते हैं, जिसे पेड़ अपने भोजन के लिए इस्तेमाल करके हवा को शुद्ध करते हैं।
    • भोजन श्रृंखला: पेड़ सूर्य की ऊर्जा से भोजन बनाते हैं, जिसे खाकर जीव-जंतु अपने प्राणों का निर्वाह करते हैं।
    • परागण: मधुमक्खी और तितली जैसे जीव फूलों से शहद पीते हैं और बदले में पराग-कणों को फैलाकर पेड़ों को बीज बनाने में मदद करते हैं।

    इस प्रकार, दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं और उनका अस्तित्व एक-दूसरे पर निर्भर करता है।

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