यह एक ओजपूर्ण और वीर रस से भरी कविता है, जिसके कवि श्री श्यामनारायण पाण्डेय हैं। इस कविता में कवि ने महाराणा प्रताप के प्रिय और वीर घोड़े ‘चेतक’ की युद्ध के मैदान में दिखाई गई असाधारण वीरता, गति और स्वामी-भक्ति का बहुत ही सजीव वर्णन किया है।
कवि का संक्षिप्त परिचय
श्री श्यामनारायण पाण्डेय (1907-1991) हिंदी के एक प्रसिद्ध कवि थे, जो अपनी वीर रस की कविताओं के लिए जाने जाते हैं। यह कविता उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना ‘हल्दीघाटी’ का एक छोटा सा अंश है। ‘हल्दीघाटी’ ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के समय में लोगों के अंदर जोश और उत्साह भरने का काम किया था।
कविता का सरल सारांश
कवि कहते हैं कि युद्ध के मैदान में चेतक चौकड़ी भर-भरकर (तेजी से कूदते हुए) दौड़ रहा था और उसकी यह अदा सबसे निराली थी। उसकी गति इतनी तेज थी कि मानो उसने हवा को भी मुकाबले में पीछे छोड़ दिया हो।
चेतक इतना समझदार और अपने स्वामी के प्रति इतना वफादार था कि महाराणा प्रताप को कभी उस पर कोड़ा चलाने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी। वह दुश्मनों के सिर के ऊपर से ऐसे छलाँग लगाता था, मानो वह जमीन पर नहीं, बल्कि आसमान में दौड़ रहा हो।

महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक अपनी वीरता और स्वामी-भक्ति के लिए प्रसिद्ध है।
राणा के मन की बात वह तुरंत समझ जाता था। जैसे ही लगाम थोड़ी-सी हिलती, वह अपने सवार (महाराणा प्रताप) को लेकर हवा में उड़ने लगता था। राणा की आँख की पुतली घूमने से पहले ही चेतक उस दिशा में मुड़ जाता था।
उसने युद्ध के मैदान में भयानक भालों, ढालों और तलवारों के बीच से बड़ी निडरता और कुशलता से अपना रास्ता बनाया। उसकी गति इतनी तेज थी कि वह एक पल यहाँ होता तो दूसरे ही पल कहीं और। वह बढ़ती हुई नदी की लहरों की तरह आगे बढ़ता और फिर अचानक रुक जाता। वह दुश्मन की सेना पर एक भयानक और गरजते हुए बादल की तरह टूट पड़ता था।
चेतक के मुख्य गुण
- अविश्वसनीय गति: उसकी गति हवा से भी तेज थी।
- समझदारी और स्वामी-भक्ति: वह बिना कोड़े के, केवल इशारों से ही राणा प्रताप की बात समझ जाता था।
- निर्भयता और साहस: वह युद्ध के खतरनाक माहौल में भालों और तलवारों के बीच से निडर होकर गुजरता था।
- अद्भुत कौशल: युद्ध के मैदान में दौड़ने और दुश्मनों पर हमला करने का उसका तरीका अनोखा और कुशल था।
अभ्यास के लिए नए प्रश्न और उत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
- कविता में ‘अरि-मस्तक’ का क्या अर्थ है?
(क) मित्र का सिर
(ख) अपना सिर
(ग) शत्रु का सिर
(घ) घोड़े का सिर
उत्तर: (ग) शत्रु का सिर - राणा की पुतली फिरने से पहले चेतक के मुड़ जाने का क्या अर्थ है?
(क) चेतक बहुत तेज दौड़ता था।
(ख) चेतक बहुत समझदार था और राणा के मन की बात समझ जाता था।
(ग) राणा की आँखें कमजोर थीं।
(घ) चेतक को रास्ता पता था।
उत्तर: (ख) चेतक बहुत समझदार था और राणा के मन की बात समझ जाता था। - चेतक की तुलना किससे नहीं की गई है?
(क) निराले घोड़े से
(ख) आसमान पर दौड़ते घोड़े से
(ग) बढ़ते नद से
(घ) शांत समुद्र से
उत्तर: (घ) शांत समुद्र से - ‘हय-टापों से खन गया अंग’ – इस पंक्ति में ‘टापों’ का क्या अर्थ है?
(क) घोड़े के खुर
(ख) एक प्रकार का हथियार
(ग) घोड़े की लगाम
(घ) एक प्रकार का टापू
उत्तर: (क) घोड़े के खुर - चेतक का रंग देखकर कौन दंग रह गया?
(क) राणा प्रताप
(ख) कवि
(ग) वैरी-समाज (शत्रु दल)
(घ) हवा
उत्तर: (ग) वैरी-समाज (शत्रु दल)
लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न 1: चेतक को राणा प्रताप के कोड़े की ज़रूरत क्यों नहीं पड़ती थी?
उत्तर: चेतक इतना समझदार और अपने स्वामी राणा प्रताप के प्रति इतना वफादार था कि वह उनके मन के भावों और छोटे-से-छोटे इशारों को तुरंत समझ लेता था, इसलिए उसे कभी कोड़े की ज़रूरत नहीं पड़ी। - प्रश्न 2: कवि ने चेतक को ‘निराला’ क्यों कहा है?
उत्तर: कवि ने चेतक को ‘निराला’ इसलिए कहा है क्योंकि युद्ध के मैदान में उसकी गति, फुर्ती, समझदारी और वीरता का तरीका सबसे अनोखा और अद्भुत था। - प्रश्न 3: ‘करवालों’ शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर: ‘करवालों’ शब्द का अर्थ तलवारों है। चेतक तलवारों के बीच से भी निडर होकर दौड़ता था। - प्रश्न 4: शत्रु सेना पर चेतक किस प्रकार टूट पड़ता था?
उत्तर: शत्रु सेना पर चेतक एक विकराल और वज्र के समान गरजने वाले बादल की तरह टूट पड़ता था। - प्रश्न 5: चेतक की तेज गति के लिए कवि ने क्या पंक्तियाँ लिखी हैं?
उत्तर: चेतक की तेज गति के लिए कवि ने लिखा है: “है यहीं रहा, अब यहाँ नहीं, वह वहीं रहा है वहाँ नहीं।”
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न 1: कवि ने चेतक की गति और फुर्ती को दर्शाने के लिए किन-किन उपमाओं का प्रयोग किया है? विस्तार से समझाइए।
उत्तर: कवि ने चेतक की गति और फुर्ती को दर्शाने के लिए कई सुंदर उपमाओं का प्रयोग किया है:- हवा से तुलना: कवि कहते हैं कि चेतक की गति इतनी तेज थी कि मानो “पड़ गया हवा को पाला था”।
- आसमान में उड़ना: वह दुश्मनों के सिरों के ऊपर से ऐसे दौड़ता था जैसे “आसमान पर घोड़ा था”।
- लहर और बादल से तुलना: उसकी चाल की तुलना “बढ़ते नद-सा” यानी नदी की उफनती लहर से की गई है। वहीं, दुश्मन पर उसके हमले की तुलना “विकराल वज्र-मय बादल-सा” से की गई है।
- प्रश्न 2: ‘चेतक की वीरता’ कविता के आधार पर चेतक के चरित्र की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: इस कविता के आधार पर चेतक केवल एक जानवर नहीं, बल्कि एक महान योद्धा प्रतीत होता है। उसके चरित्र की मुख्य विशेषताएँ हैं:- स्वामी-भक्ति: वह अपने स्वामी महाराणा प्रताप के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित है।
- निर्भीकता: वह युद्धभूमि में भालों और तलवारों के घातक प्रहारों से नहीं डरता।
- अतुलनीय गति: उसकी गति हवा से भी तेज है, जिससे दुश्मन भ्रमित हो जाते हैं।
- समझदारी: वह एक समझदार साथी की तरह राणा के मन की बात को भी भांप लेता है।
- प्रश्न 3: इस कविता में वीर रस का अद्भुत प्रयोग हुआ है। कविता से कुछ ऐसी पंक्तियाँ छाँटकर लिखिए जिनसे वीरता का भाव प्रकट होता हो और उनका अर्थ भी समझाइए।
उत्तर: इस कविता में वीर रस की कई पंक्तियाँ हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं:- “निर्भीक गया वह ढालों में, सरपट दौड़ा करवालों में।”
अर्थ: यह पंक्ति चेतक की निर्भयता को दर्शाती है। वह बिना किसी डर के दुश्मनों की ढालों और तलवारों के बीच से तेजी से दौड़ता चला गया। - “विकराल बज्र-मय बादल-सा, अरि की सेना पर घहर गया।”
अर्थ: यहाँ चेतक के आक्रमण की भयानकता दिखाई गई है। वह दुश्मन की सेना पर ऐसे टूट पड़ा जैसे कोई भयानक बादल बिजली गिराते हुए गरज रहा हो। - “भाला गिर गया, गिरा निषंग, हय-टापों से खन गया अंग।”
अर्थ: यह पंक्ति चेतक के पराक्रम का परिणाम दिखाती है। उसकी मार से दुश्मनों के भाले और तरकश गिर गए और उसके खुरों से उनके शरीर कुचले गए।
- “निर्भीक गया वह ढालों में, सरपट दौड़ा करवालों में।”
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