अध्याय 1: मातृभूमि

यह अध्याय एक कविता पर आधारित है जिसके कवि श्री सोहनलाल द्विवेदी जी हैं। इस कविता में कवि ने अपने देश, भारत, के प्रति अपने प्रेम और सम्मान को प्रकट किया है। उन्होंने भारत की सुंदरता, इसके महान इतिहास और इसकी पवित्र भूमि का गुणगान किया है।

कविता का सरल सारांश

कवि कहते हैं कि मेरा देश वो धरती है जिसके सिर पर हिमालय का मुकुट है और जिसके पैरों को समुद्र हमेशा धोता है। यहाँ गंगा और यमुना जैसी पवित्र नदियाँ बहती हैं, जो इस भूमि को और भी पुण्य बनाती हैं। यह भूमि सोने की तरह मूल्यवान है क्योंकि इसकी हर जगह पर सुंदरता बिखरी हुई है। पहाड़ों से गिरते झरने और झाड़ियों में चहकते पक्षी मन को मोह लेते हैं। यहाँ आम के बागों में कोयल की मीठी बोली गूँजती है और चंदन के जंगलों से आने वाली ठंडी हवा तन और मन को ताजगी देती है।

यह केवल एक जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि हमारी धर्म-भूमि और कर्म-भूमि है। यहीं पर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम और माता सीता ने जन्म लिया था। यहीं श्री कृष्ण ने दुनिया को गीता का महान ज्ञान दिया और भगवान बुद्ध ने पूरी दुनिया को दया और करुणा का पाठ पढ़ाया। कवि के लिए यह युद्ध-भूमि भी है, जहाँ न्याय के लिए लड़ाइयाँ लड़ी गईं, और बुद्ध-भूमि भी, जहाँ शांति का संदेश दिया गया। अंत में, कवि कहते हैं कि यही मेरी जन्मभूमि है और यही मेरी माँ के समान मातृभूमि है।

A beautiful landscape showing the Himalayas in the north and the ocean in the south of India.

कविता में भारत के प्राकृतिक सौंदर्य का सुंदर वर्णन है, जिसमें हिमालय का मुकुट और समुद्र का चरण पखारना शामिल है।

कविता के मुख्य भाव

  • देश का प्राकृतिक सौंदर्य: कवि ने भारत की मनमोहक प्रकृति का वर्णन किया है। जैसे ऊँचे पहाड़, बहती नदियाँ, हरे-भरे जंगल और सुंदर पक्षी।
  • गौरवशाली संस्कृति: भारत की भूमि महान हस्तियों की जन्मभूमि है। यहाँ राम, कृष्ण और बुद्ध जैसे महापुरुषों ने जन्म लेकर दुनिया को धर्म, कर्म और शांति का मार्ग दिखाया।
  • देशभक्ति की भावना: यह कविता हर भारतीय के मन में अपने देश के लिए गर्व और प्रेम की भावना जगाती है।

कवि का संक्षिप्त परिचय

इस सुंदर कविता को श्री सोहनलाल द्विवेदी जी ने लिखा है। वे एक प्रसिद्ध कवि थे जिनका जन्म भारत की आज़ादी से पहले हुआ था। उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से लोगों में देशभक्ति की भावना जगाई और भारत के गौरवशाली अतीत का गुणगान किया।

अभ्यास के लिए नए प्रश्न और उत्तर

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)

  1. कवि ने ‘आकाश चूमता है’ किसके लिए कहा है?
    (क) बादलों के लिए
    (ख) हिमालय के लिए
    (ग) ऊँची इमारतों के लिए
    (घ) सूरज के लिए
    उत्तर: (ख) हिमालय के लिए
  2. ‘स्वर्ण-भूमि’ का क्या अर्थ है?
    (क) जहाँ सोना मिलता है
    (ख) सोने की तरह कीमती और सुंदर धरती
    (ग) पीली मिट्टी वाली धरती
    (घ) रेगिस्तानी धरती
    उत्तर: (ख) सोने की तरह कीमती और सुंदर धरती
  3. ‘मलय पवन’ की क्या विशेषता है?
    (क) वह बहुत तेज़ बहती है
    (ख) वह गरम होती है
    (ग) वह सुगंधित और ठंडी होती है
    (घ) वह धूल उड़ाती है
    उत्तर: (ग) वह सुगंधित और ठंडी होती है
  4. कविता में ‘दिया दिखाया’ का क्या तात्पर्य है?
    (क) लालटेन जलाना
    (ख) अज्ञानता को मिटाकर ज्ञान फैलाना
    (ग) रास्ता दिखाना
    (घ) आग जलाना
    उत्तर: (ख) अज्ञानता को मिटाकर ज्ञान फैलाना
  5. कवि ने अपनी मातृभूमि को ‘बुद्ध-भूमि’ क्यों कहा है?
    (क) क्योंकि यहाँ बुद्ध की कई मूर्तियाँ हैं
    (ख) क्योंकि यहाँ भगवान बुद्ध ने जन्म लेकर दुनिया को शांति का संदेश दिया
    (ग) क्योंकि यहाँ के लोग बुद्धिमान हैं
    (घ) क्योंकि यहाँ बौद्ध धर्म की किताबें हैं
    उत्तर: (ख) क्योंकि यहाँ भगवान बुद्ध ने जन्म लेकर दुनिया को शांति का संदेश दिया

लघु उत्तरीय प्रश्न

  1. प्रश्न 1: कवि के अनुसार, समुद्र क्या करता है?
    उत्तर: कवि के अनुसार, समुद्र भारत माता के चरणों के नीचे झुककर उसे प्रणाम करता है, यानी उसके पैरों को धोता है।
  2. प्रश्न 2: कविता में किन-किन नदियों का उल्लेख किया गया है?
    उत्तर: कविता में गंगा और यमुना नदियों का उल्लेख किया गया है।
  3. प्रश्न 3: कोयल कहाँ और कैसे बोलती है?
    उत्तर: कोयल आम के घने बागों (अमराइयों) में मीठी आवाज़ में पुकारती है।
  4. प्रश्न 4: श्री कृष्ण ने दुनिया को क्या अनमोल संदेश दिया?
    उत्तर: श्री कृष्ण ने दुनिया को ‘गीता’ का पवित्र और कर्म करने का अनमोल संदेश दिया।
  5. प्रश्न 5: चिड़ियाँ कहाँ चहक रही हैं?
    उत्तर: चिड़ियाँ पहाड़ों की झाड़ियों में मस्ती से चहक रही हैं।
  6. प्रश्न 6: मातृभूमि को ‘धर्मभूमि’ क्यों कहा गया है?
    उत्तर: मातृभूमि को ‘धर्मभूमि’ इसलिए कहा गया है क्योंकि यहाँ श्री राम जैसे महापुरुषों ने जन्म लिया जिन्होंने धर्म का पालन करना सिखाया।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

  1. प्रश्न 1: ‘मातृभूमि’ कविता में भारत की प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
    उत्तर: ‘मातृभूमि’ कविता में कवि ने भारत की प्राकृतिक सुंदरता का बहुत ही मनमोहक चित्रण किया है। वे बताते हैं कि भारत के उत्तर में दुनिया का सबसे ऊँचा पर्वत हिमालय है, जो ऐसा लगता है मानो आसमान को छू रहा हो। दक्षिण में विशाल समुद्र है जो देश के चरणों को पखारता है। यहाँ गंगा-यमुना जैसी पवित्र नदियाँ बहती हैं। पहाड़ों से गिरते झरने और घने जंगलों में गाते पक्षी इसकी सुंदरता को और बढ़ाते हैं।
  2. प्रश्न 2: कवि ने भारत को ‘युद्ध-भूमि’ और ‘बुद्ध-भूमि’ दोनों क्यों कहा है? विस्तार से समझाइए।
    उत्तर: कवि ने भारत को ‘युद्ध-भूमि’ और ‘बुद्ध-भूमि’ कहकर इसकी दो बड़ी विशेषताओं को एक साथ बताया है।

    • युद्ध-भूमि: भारत की भूमि पर धर्म और न्याय की रक्षा के लिए अनेक युद्ध हुए हैं, जैसे महाभारत का युद्ध।
    • बुद्ध-भूमि: इसी भूमि पर भगवान बुद्ध जैसे शांति के दूत ने भी जन्म लिया, जिन्होंने पूरी दुनिया को अहिंसा, दया और करुणा का मार्ग दिखाया।

    इस प्रकार, भारत एक ऐसी अनोखी भूमि है जहाँ ज़रूरत पड़ने पर न्याय के लिए शस्त्र भी उठाए गए और दुनिया को शांति का पाठ भी पढ़ाया गया।

  3. प्रश्न 3: ‘वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी’ – इन पंक्तियों का क्या आशय है?
    उत्तर: इन पंक्तियों का गहरा अर्थ है। ‘जन्मभूमि’ का मतलब है वह स्थान जहाँ हमारा जन्म हुआ है। यह हमें हमारी जड़ों का अहसास कराती है। ‘मातृभूमि’ का अर्थ है वह धरती जो हमारी माँ के समान है। जैसे एक माँ अपने बच्चों का पालन-पोषण करती है, वैसे ही यह धरती हमें अन्न, जल और जीवन जीने के लिए सब कुछ देती है। कवि कहना चाहते हैं कि भारत केवल उनके जन्म का स्थान ही नहीं, बल्कि उनकी माँ के समान पूजनीय भी है।
  4. प्रश्न 4: कविता के आधार पर बताइए कि भारत भूमि को किन-किन महापुरुषों ने पवित्र किया है और कैसे?
    उत्तर: कविता के अनुसार, भारत की भूमि को कई महापुरुषों ने अपने जन्म और कार्यों से पवित्र किया है। यहाँ भगवान श्री राम और माता सीता ने जन्म लिया, जिन्होंने त्याग और आदर्श जीवन का उदाहरण प्रस्तुत किया। यहीं पर भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश देकर दुनिया को कर्म का महान ज्ञान दिया। इसके अलावा, गौतम बुद्ध ने इसी धरती से पूरी दुनिया को दया, करुणा और शांति का संदेश दिया।

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