यह एक यात्रा-वृत्तांत है, जिसे राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने लिखा है। इस पाठ में लेखक अपनी मॉरिशस यात्रा के अनुभवों का वर्णन करते हैं। वे बताते हैं कि कैसे मॉरिशस, जो भारत से हज़ारों मील दूर है, अपनी संस्कृति और संस्कारों में एक छोटा-सा हिंदुस्तान जैसा लगता है।
लेखक का संक्षिप्त परिचय
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ (1908-1974) हिंदी के एक महान लेखक और कवि थे। उनकी रचनाओं में भारत की संस्कृति, वीरता, उत्साह और देशप्रेम का भाव प्रमुखता से मिलता है। उन्होंने बच्चों के लिए भी ‘मिर्च का मज़ा’ और ‘सूरज का ब्याह’ जैसी कई मनोरंजक पुस्तकें लिखी हैं।
यात्रा-वृत्तांत का सार
पहला पड़ाव: नैरोबी (केन्या)
मॉरिशस जाने के रास्ते में लेखक को एक दिन के लिए केन्या की राजधानी नैरोबी में रुकने का मौका मिला। वहाँ उन्होंने शेरों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने के लिए नैरोबी नेशनल पार्क घूमने का फैसला किया। यह कोई चिड़ियाघर नहीं, बल्कि एक विशाल जंगल था। वहाँ उन्होंने देखा कि शेर पर्यटकों और उनकी गाड़ियों से बिल्कुल बेपरवाह होकर आराम कर रहे थे।
दूसरा पड़ाव: मॉरिशस
नैरोबी से लेखक विमान द्वारा मॉरिशस पहुँचे। हवाई अड्डे पर हुए भव्य स्वागत को देखकर ही उन्हें महसूस हुआ कि वे किसी छोटे भारत में आ गए हैं। लेखक मॉरिशस को ‘हिंद महासागर का मोती’ कहते हैं।
मॉरिशस: एक छोटा हिंदुस्तान क्यों?
लेखक कई कारणों से मॉरिशस को एक छोटा हिंदुस्तान बताते हैं:

मॉरिशस अपनी संस्कृति और आबादी के कारण एक छोटा हिंदुस्तान जैसा लगता है।
- जनसंख्या: वहाँ की लगभग 67% आबादी भारतीय मूल की है, जिनमें से ज़्यादातर बिहार और उत्तर प्रदेश के हैं।
- स्थानों के नाम: वहाँ की राजधानी पोर्टलुई में कलकत्ता, मद्रास, हैदराबाद जैसे नामों वाली गलियाँ हैं और काशी नाम का एक पूरा मोहल्ला है।
- भाषा: वहाँ की आम बोलचाल की भाषा क्रेयोल है, लेकिन उसके बाद भोजपुरी सबसे ज़्यादा बोली और समझी जाती है।
- संस्कृति और धर्म: हर प्रमुख गाँव में शिव मंदिर है, जहाँ तुलसीदास कृत रामायण का पाठ होता है। शिवरात्रि वहाँ का सबसे बड़ा धार्मिक पर्व है।
- भारतीयों का योगदान: मॉरिशस की अर्थव्यवस्था गन्ने की खेती पर निर्भर है, जिसे भारतीय लोगों ने ही अपनी मेहनत से सफल बनाया है।
लेखक इस बात पर गर्व महसूस करते हैं कि मॉरिशस में बसे भारतीयों ने तमाम मुश्किलों के बावजूद अपनी संस्कृति और धर्म को जीवित रखा।
अभ्यास के लिए नए प्रश्न और उत्तर
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)
- लेखक मॉरिशस जाने से पहले किस शहर में रुके थे?
(क) दिल्ली
(ख) मुंबई
(ग) नैरोबी
(घ) कलकत्ता
उत्तर: (ग) नैरोबी - नैरोबी के नेशनल पार्क में लेखक को जानवरों का कौन-सा व्यवहार अजीब लगा?
(क) बंदरों का मोटर घेर लेना
(ख) शेरों का पर्यटकों पर ध्यान न देना
(ग) हिरनों का झुंड में रहना
(घ) जिराफ का बेवकूफ-सा खड़ा रहना
उत्तर: (ख) शेरों का पर्यटकों पर ध्यान न देना - मॉरिशस की आम जनता कौन-सी भाषा बोलती है?
(क) अंग्रेज़ी
(ख) फ्रेंच
(ग) भोजपुरी
(घ) क्रेयोल
उत्तर: (घ) क्रेयोल - मॉरिशस का मुख्य उद्योग क्या है?
(क) पर्यटन
(ख) चाय की खेती
(ग) चीनी का व्यवसाय
(घ) कपड़ों का व्यापार
उत्तर: (ग) चीनी का व्यवसाय - मॉरिशस में शिवरात्रि के अवसर पर लोग किस तालाब से जल भरते हैं?
(क) गंगा-तालाब
(ख) ब्रह्म-तालाब
(ग) शिव-तालाब
(घ) परी-तालाब
उत्तर: (घ) परी-तालाब
लघु उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न 1: नैरोबी नेशनल पार्क और चिड़ियाघर में क्या अंतर है?
उत्तर: चिड़ियाघर में जानवरों को पिंजरों में बंद करके रखा जाता है, जबकि नैरोबी नेशनल पार्क एक बहुत बड़ा प्राकृतिक जंगल है जहाँ जानवर आज़ादी से घूमते हैं। - प्रश्न 2: लेखक को मॉरिशस पहुँचते ही भारत जैसा अनुभव क्यों हुआ?
उत्तर: क्योंकि रात के समय और बारिश होने के बावजूद, हवाई अड्डे पर बहुत सारे लोग लेखक का स्वागत करने के लिए खड़े थे, जिससे उन्हें लगा कि वे किसी छोटे भारत में आ गए हैं। - प्रश्न 3: मॉरिशस की भोजपुरी, बिहार की भोजपुरी से अलग क्यों है?
उत्तर: मॉरिशस की भोजपुरी में फ्रेंच भाषा के बहुत सारे संज्ञा शब्द मिल गए हैं, जिस कारण वह बिहार की भोजपुरी से अलग लगती है। - प्रश्न 4: लेखक के अनुसार, भारतीयों को किस बात पर गर्व होना चाहिए?
उत्तर: लेखक के अनुसार, सभी भारतीयों को इस बात पर गर्व होना चाहिए कि मॉरिशस में बसे भारतीयों ने कठिनाइयाँ सहकर भी अपने धर्म और संस्कृति को नहीं छोड़ा और उस द्वीप को एक छोटा-सा हिंदुस्तान बना दिया। - प्रश्न 5: मॉरिशस में शिवरात्रि का त्योहार कैसे मनाया जाता है?
उत्तर: शिवरात्रि के समय, सभी हिंदू सफेद कपड़े पहनकर, कंधों पर काँवर लिए परी-तालाब से जल भरते हैं और अपने गाँव के शिव मंदिर में जाकर शिवजी को जल चढ़ाते हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
- प्रश्न 1: मॉरिशस को ‘हिंद महासागर का मोती’ और ‘छोटा-सा हिंदुस्तान’ क्यों कहा गया है? पाठ के आधार पर विस्तार से समझाइए।
उत्तर: लेखक ने मॉरिशस को ‘हिंद महासागर का मोती’ उसकी प्राकृतिक सुंदरता के कारण कहा है। उसे ‘छोटा-सा हिंदुस्तान’ कहने के कई कारण हैं:- लोग और भाषा: वहाँ की ज़्यादातर आबादी भारतीय मूल की है और वहाँ भोजपुरी बहुतायत में बोली जाती है।
- स्थान: वहाँ के शहरों में भारत के नगरों जैसे कलकत्ता, मद्रास, बनारस और गोकुल के नाम पर गलियाँ और मोहल्ले हैं।
- संस्कृति: लोग रामायण का पाठ करते हैं और शिवरात्रि जैसे त्योहार मनाते हैं।
इन सभी बातों से ऐसा लगता है मानो भारत की आत्मा का एक अंश मॉरिशस में बसता है।
- प्रश्न 2: लेखक का नैरोबी नेशनल पार्क का अनुभव कैसा रहा? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: लेखक का नैरोबी नेशनल पार्क का अनुभव बहुत ही रोमांचक और अविस्मरणीय था। वहाँ उन्होंने शेरों को उनके प्राकृतिक माहौल में देखा। उन्हें यह देखकर बहुत आश्चर्य हुआ कि शेर अपने आसपास खड़ी मोटरों और उनमें बैठे इंसानों की तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहे थे। इसके बाद, उन्होंने दो शेरों को हिरनों के झुंड का शिकार करने के लिए घात लगाते हुए देखा। उस तनावपूर्ण माहौल को देखकर लेखक का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। - प्रश्न 3: “भारतीय संस्कृति कितनी प्राणवती और चिरायु है,” लेखक ने ऐसा क्यों कहा है? मॉरिशस के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: लेखक ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि उन्होंने मॉरिशस में भारतीय संस्कृति को हज़ारों मील दूर और एक अलग परिवेश में भी पूरी जीवंतता के साथ फलते-फूलते देखा। मॉरिशस ले जाए गए भारतीयों पर अपना धर्म छोड़ने के लिए दबाव डाला गया, पर उन्होंने अत्याचार तो सहे लेकिन अपनी संस्कृति नहीं छोड़ी। वे अपनी भाषा, अपने धर्म, और अपनी परंपराओं से जुड़े रहे। उन्होंने न केवल अपनी पहचान बचाए रखी, बल्कि उस अनजान द्वीप पर एक छोटे भारत का निर्माण कर दिया। यह देखकर लेखक को अपनी संस्कृति की शक्ति और अमरता का गहरा अहसास हुआ।
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